Semiconductor n type – p type

Semiconductor

Topic – n type, p type

Class – 12th

प्रश्न 1 : नैज अर्धचालक की संरचना समझाइये एवं इसमें धारा प्रवाह किस प्रकार होता है ।

उत्तर : नैज अर्धचालक ( pure semiconductor ) की संरचना सम चतुष्फलकीय होती है ।

किसी अर्द्धचालक की संरचना समझने के लिए जर्मेनियम ( Ge ) का उदाहरण लेते है जिसका इलेक्ट्रोनिक विन्यास 2,8,18,4 होता है । इसके बाहरी कोश में electron की संख्या 4 होती है । अतः यह अष्टक बनाने के लिए अन्य जर्मेनियम परमाणु के 4 इलेक्ट्रॉन से सह संयोजक बंध बना लेते है । इस प्रकार एक भी e स्वतंत्र नहीं है । अतः शून्य कैल्विन ताप पर पूर्ण कुचालक होता है । जैसे जैसे ताप बढ़ाते है वैसे वैसे e तापीय ऊर्जा ग्रहण करके चालन बैण्ड में पहुच जाते है इस प्रकार संयोजकता बैण्ड में इलेक्ट्रॉन की कमी हो जाती है इस कमी को कोटर कहते है । जो धनावेशित कण की तरह व्यवहार करती है । इस प्रकार नेज अर्द्धचालक में स्वतंत्र electrons की संख्या ne और स्वतंत्र कोटरों की संख्या nn दोनों बराबर होते है ।

प्रश्न 2 : n – प्रकार के अर्द्धचालक का निर्माण चित्र बनाकर समझाइये?

बाह्य अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं

n- टाइप अर्धचालक ( n – type Semiconductor in hindi ) : :

जब किसी जर्मेनियम अथवा सिलिकॉन क्रिस्टल में पांच संयोजकता वाला अपद्रव्य परमाणु मिलाया जाता है तो तो वह जर्मेनियम के एक परमाणु को हटाकर उसका स्थान ले लेता है । अपद्रव्य परमाणु के पांच संयोजक इलेक्ट्रानों में से 4 इलेक्ट्रान अपने चारों ओर स्थित जर्मेनियम के चार परमाणुओं के एक – एक संयोजक इलेक्ट्रॉन के साथ सहसंयोजक बंध बना लेते हैं । 5 वां संयोजक इलेक्ट्रॉन अपद्रव्य के परमाणु से अलग हो जाता है तथा क्रिस्टल के भीतर मुक्त रूप से चलने लगता है । यही इलेक्ट्रान और आवेश वाहक का कार्य करता है करता । इस प्रकार शुद्ध जर्मेनियम में अपद्रव्य मिलाने से मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है अर्थात क्रिस्टल की चालकता बढ़ जाती है ।। इस प्रकार के अशुद्ध जर्मेनियम क्रिस्टल को n- टाइप अर्धचालक कहते हैं क्योंकि इसमें आवेश वाहक ( मुक्त इलेक्ट्रॉन ) ऋणात्मक होते हैं । अपद्रव्य परमाणुओं को दाता परमाणु परमाणु परमाणु कहते हैं क्योंकि ये क्रिस्टल को चालक इलेक्ट्रॉन प्रदान करते हैं ।



प्रश्न 3: p – प्रकार के अर्द्धचालक का निर्माण चित्र बनाकर समझाइये?

Semiconductor in hindi : यदि जर्मेनियम अथवा सिलिकॉन क्रिस्टल में तीन संयोजकता वाला अपद्रव्य परमाणु को मिलाया जाता है तो यह भी एक जर्मेनियम परमाणु का स्थान ले लेता है । इसके तीन संयोजक इलेक्ट्रॉन तीन निकटतम जर्मेनियम परमाणुओं के एक – एक संयोजक इलेक्ट्रॉन के साथ मिलकर सहसंयोजक बंध बना लेते हैं । जबकि जर्मेनियम का चौथा संयोजक इलेक्ट्रॉन बंध नहीं बना पाता । अतः क्रिस्टल में अपद्रव्य परमाणु के एक ओर रिक्त स्थान रह जाता है जिसे कोटर ( Hole ) कहते हैं । बाह्य वैद्युत क्षेत्र लगाने पर कोटर में पड़ोसी जर्मेनियम परमाणु से बंधा हुआ एक इलेक्ट्रॉन आ जाता है जिससे पड़ोसी परमाणु में एक स्थान रिक्त होकर कोटर बन जाता है । इस प्रकार कोटर क्रिस्टल के भीतर एक स्थान से दूसरे स्थान पर विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में चलने लगता है । स्पष्ट है कि कोटर धनावेशित कण के तुल्य जो इलेक्ट्रॉन के सापेक्ष विपरीत दिशा में चलता है । इस प्रकार के अपद्रव्य मिले जर्मेनियम क्रिस्टल को p टाइप अर्धचालक कहते हैं क्योंकि इसमें आवेश वाहक धनात्मक होते हैं । अपद्रव्य परमाणुओं को ग्राही परमाणु कहते हैं क्योंकि वह शुद्ध अर्धचालक से इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करता है ।

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