सफलता के 7 पड़ाव-चौथा 4️⃣पड़ाव

यदि आप विजेता बनना चाहते हैं, जीवन में सफल होना चाहते हैं, तो यह निश्चित ध्यान में रखें कि जीवन में सफल होने वाले व्यक्ति, सामान्य व्यक्तियों से कुछ हटकर होते हैं। वे सामान्य व्यक्तियों की तरह, जीवन को व्यर्थ नहीं करते। उनका जीवन सुनियोजित होता है। वे समय का मूल्य समझते हैं। उनमें कुछ ऐसे गुण हैं, जिनसे उनकी विजेता बनने की राह आसान होती है

आपका जीवन एक खाली किताब की तरह है जिसमे आपके जीवन की कहानी आप को स्वयं ही लिखनी है !

nishant royel

सफलता का चौथा पड़ाव

4. असफलताओं / गलतियों से सबक लें

be the best
invest in yourself
invest in yourself

जीत की राह में गलतियों के बहुत से स्टॉप आते हैं , क्योंकि सफलता कई असफलताओं का योग है । जैसे ही आप असफल होते है या गलतियां करते हैं , वैसे ही आप सफलता के और नजदीक पहुंचते हैं । असफलताओं से सबक लें । स्वयं के द्वारा की गई गलतियों का विश्लेषण करें । आगे इनकी पुनरावृत्ति न हो , ऐसा प्रयास करें । असफलताओं से निराश न हो । धैर्य रखे । पुनः प्रयास करे । पुन : स्वयं को तैयार करें । अपनी योग्यता एवं क्षमताओं पर विश्वास रखें । सफल होने के लिए आपको धैर्यवान होना होगा , क्योंकि आप कई बार असफल भी होगे , आप गलतियाँ भी करेंगे , लेकिन असफलताओं को स्वयं पर हावी न होने दें ।

be the best of you.

The only man who never makes a mistake is the one who never does anything .

( केवल वही व्यक्ति गलती नहीं करता , जो कभी कुछ नहीं करता – थियोडोर रूजवेल्ट )

Theodore Roosevelt

थॉमस एल्वा एडीसन जिन्होंने बल्ब का आविष्कार किया , 10,000 प्रयोग असफल हुए , लेकिन उन्होंने धैर्य नहीं छोड़ा एवं असफलताओं को स्वयं पर हावी नहीं होने दिया अन्ततः एक दिन वह सफल हुए और कितने ही आविष्कारों के जन्मदाता बने

परिस्थितियों के सम्मुख नतमस्तक नहीं होने वाले एवं असफलताओं को सफलता की सीढ़ी बनाने वाले जुझारू और दृढ़ निश्चयी इन्सान अन्ततः सफल होते हैं । पराजित वे हैं , जो एक बार असफल होकर बैठ जाते हैं । असफल उसे ही कहा जाता है , जो एक बार असफल या निराश होकर , मैदान से हट जाता है । असफलताओं के आघात से निराश होकर बैठ जाना ही कायरता है ।

असफलताओं की कसौटी पर ही आपके पुरुषार्थ , साहस , धैर्य एवं आत्मविश्वास की परख होती है । जो इस कसौटी पर खरा उतरता है , वहीं विजयी होता है । सफलता रूपी पथ पर , गलतियाँ रूपी काँटे बिखरे होते हैं , जो आपको चुभते है । आप उन काँटों से सबक लें , उन्हें दूर करें अथवा उनकी पहचान करें एवं आगे बढ़ें ।

असफलता अथवा पराजय से निराश एवं निष्क्रिय होने वाले व्यक्ति का नहीं , बल्कि अपनी कमियों एवं गलतियों का विश्लेषण कर , उन्हें अपना मार्गदर्शक बनाकर , दोगुने उत्साह से आगे बढ़ने वाले व्यक्ति का विजयश्री स्वागत करते है , वन्दन करती है । उन्हें अपना विजयहार पहनाती है , उन्हें गले लगाती है ।

हुमायूँ 21 बार हारकर जीता एवं दिल्ली का राजसिंहासन पठानों से छीना ! पराजय से ही विजय का जन्म होता है , असफलताओं से ही सफलता पनपती है । जब मनुष्य इन्हें अपना मार्गदर्शक बनाकर , नई स्फूर्ति , उत्साह एवं नए अनुभव के साथ आगे बढ़ता है , तब वह अन्ततः विजयी होता है जिसने असफलता को केवल असफलता समझकर छोड़ दिया , उससे कोई शिक्षा ग्रहण नहीं की कोई सबक नहीं सीखा , उन्हें अपना मार्गदर्शक नहीं बनाया , उसकी उपेक्षा कर दी ते आप समझ लीजिए कि वह सफलता से कोसों दूर चला गया । अमेरिकी राष्ट्रपति ( अब्राहम लिंकन ) ने 21 वर्ष की उम्र से 51 वर्ष की उम्र तक असफलता का ही वरण किया , लेकिन 52 वर्ष की उम्र में सफलता ने उनका वरण किया । हिन्दी सिनेमा के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को ही लें । शुरूआत के दिनों में असफल लम्बू कहलाने वाला यह उपेक्षित अभिनेता आज तक सबके दिलों पर राज कर रहा है । वुडरो विल्सन ने कहा है में उस काम में असफल होना पसन्द करूँगा , जो आखिर में सफल हो । जब आप असफल होते है , तो यह साबित हो जाता है कि सफलता का प्रयास पूर्ण मनोयोग से नहीं किया गया अर्थात् उसमें कुछ गलतियाँ , कमियाँ रह गई ।

बस इन कमियों , गलतियों से सीखे और पूरे आत्मविश्वास से पुनः प्रयास करें , विजयश्री आपका वरण करेगी ।

5वे पड़ाव की ओर बढ़ें

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