विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम ( Electromagnetic Spectrum ) तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति परिसर ( ranges ) , उत्पादन की विधि , गुण तथा उपयोग

विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम ( Electromagnetic Spectrum ) सूर्य के प्रकाश के स्पेक्ट्रम में लाल रंग से लेकर बैगनी रंग तक दिखाई पड़ते हैं । इस स्पेक्ट्रम को ‘ दृश्य स्पेक्ट्रम ‘ ( visible spectrum ) कहते है । दृश्य स्पेक्ट्रम के लाल रंग में सबसे लम्बी तरंगदैर्ध्य ( wavelength ) का मान लगभग 7.8 x 10 मीटर और बैंगनी रंग में सबसे छोटी तरंगदैर्य का मान लगभग 4.0 x 10- मीटर होता है । इस प्रकार दृश्य स्पेक्ट्रम 7.8 x 10 मीटर से लेकर 4.0 x 10 मीटर तक फैला हुआ होता है ।

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न्यूटन के बाद विभिन्न अन्वेषकों ने यह पता लगाया कि सूर्य के प्रकाश का स्पेक्ट्रम केवल लाल रंग से लेकर बैंगनी रंग तक ही सीमित नहीं है बल्कि लाल रंग से ऊपर तथा बैगनी रंग से नीचे भी काफी विस्तार में फैला हुआ है । स्पेक्ट्रम के इन भागों का आँख की रेटिना पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता । अत : इन्हें ‘ अदृश्य स्पेक्ट्रम ‘ ( invisible spectrum ) कहते हैं । लाल रंग से ऊपर बड़ी तरंगदैयं वाले भाग को ‘ अवरक्त स्पेक्ट्रम ‘ ( infrared Recrum ) तथा बैगनी रंग से नीचे छोटो तरंगदैर्घ्य वाले भाग को ‘ पराबैगनी स्पेक्ट्रम ‘ ( ultra – violet spectrum ) कहते हैं

बाद के अन्वेषणों से x- किरणों , गामा – किरणों तथा रेडियो तरंगों का आविष्कार हुआ । अब यह स्थापित हो चुका है कि ये सभी विकिरण ( दृश्य स्पेक्ट्रम सहित ) विद्युतचुम्बकीय तरंगें ( electromagnetic waves ) है । इन तरंगों की तरंगदैयों का बहुत अधिक विस्तार होता है तथा इसी आधार इन्हें एक क्रम में रखा जा सकता है । इस क्रम को ‘ विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम ‘ कहते हैं ।

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इसमें अत्यन्त लघु गामा – किरणों से लेकर अत्यन्त दीर्घ रेडियो तरंगें तक आती है दृश्य स्पेक्ट्रम विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का केवल एक बहुत छोटा – सा भाग है ।

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सम्पूर्ण विद्युतचुम्बकीय स्पेक्ट्रम का तरंगदैर्ध्य तथा आवृत्ति परिसर ( ranges ) , उत्पादन की विधि , गुण तथा उपयोग का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है !

( 1 ) गामा – किरणें ( y – Rays )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 1×10-14 से 1 x 10-10 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 3 x 1022 से 3 x 1018 हर्ट्स तक ।

उत्पादन- परमाणुओं के नाभिकों का विघटन होने पर उत्सर्जित होती हैं ।

गुण : फोटोग्राफिक प्लेटों पर रासायनिक क्रिया , प्रतिदीप्ति , स्फुरदीप्ति , आयनी- करण , विवर्तन , उच्च वेधन क्षमता तथा आवेशरहित , मनुष्य के लिये हानिकारक । परमाणु के नाभिक की संरचना के सम्बन्ध में सूचना देती है । ये चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिये भी उपयोगी हैं ।

( 2 ) एक्स – किरणें ( X – Rays )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 1 x 10-11 से 3 x -10– मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 3×1019 से 1×1016 हर्ट्स तक ।

उत्पादन- तीव्रगामी इलेक्ट्रॉनों के उच्च परमाणु – क्रमांक के लक्ष्य पर टकराने से उत्पन्न होती हैं ।

गुण : Y- किरणों वाले सभी गुण , परन्तु वेधन – क्षमता कम होती है । उपयोग : परमाणु के भीतरी इलेक्ट्रॉन कोश की संरचना के जानने में तथा रोगों के निदान में सहायक होती हैं ।

(3) पराबैंगनी विकिरण ( Ultraviolet Radiation )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 1×10-8 से 4×10-7 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 3×1016 से 8×1014 हर्ट्स तक ।

उत्पादन : सूर्य , आर्क , स्पार्क , गर्म निर्वात् स्पार्क तथा आयनित गैसों द्वारा उत्पन्न होता है ।

गुण : r- किरणों वाले सभी गुण , परन्तु कम वेधन करने वाली है , प्रकाश – वैद्युत प्रभाव उत्पन्न करती हैं । उपयोग : अदृश्य लिखाई , नकली दस्तावेजों , अंगुली के निशानों का पता लगाने में तथा खाने की वस्तुओं के संरक्षण मे । जल शोधक में पराबैगनी लैम्पों का उपयोग जीवाणुओं को मारने में होता है ।

( 4 ) दृश्य विकिरण ( Visible Radiation )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 4×10 से 7.8×10-7 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 8×1014 से 4 x 1014 हर्ट्स तक ।

उत्पादन- आयनित गैसों के उत्तेजित परमाणुओं द्वारा तथा तापदीप्त ( incandescent ) वस्तुओं से विकिरत ।

गुण : परावर्तन , अपवर्तन , व्यतिकरण , विवर्तन , ध्रुवण , प्रकाश – वैद्युत प्रभाव , फोटोग्राफिक क्रिया तथा दृष्टि संवेदन ( sensation of sight ) |

उपयोग : हमारे नेत्र तरंगदैर्गों के इस परास के लिये संवेदनशील हैं । विभिन्न जन्तु तरंगदैयों के विभिन्न परासो के लिये संवेदनशील हैं । उदाहरणार्थ सर्प अवरक्त तरंगों को संसूचित कर सकते हैं । अणुओं की संरचना तथा परमाणु के बाह्य कोशो में इलेक्ट्रॉनों के प्रबन्धन का पता लगाने में होता है ।

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(5.)अवरक्त विकिरण ( Infrared Radiation )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 7×10-7 से 5-10-3 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 4×1014 से 6×1010 हर्ट्स तक ।

उत्पादन : गर्म वस्तुओ से तथा अणुओं मे घूर्णन तथा कम्पनिक संक्रमणों द्वारा ।

गुण : ताप – पुँजो ( thermopiles ) तथा बोलोमीटर इत्यादि पर ऊष्मीय – प्रभाव , परावर्तन , अपवर्तन , विवर्तन , फोटोग्राफी क्रिया ।

उपयोग : पौध घरो में पौधों को गर्म रखने में , युद्ध के दिनों में कोहरे व धुन्ध के पार देखने में होता है ।

(6.)सूक्ष्म अथवा माइक्रोतरंगें ( Microwaves )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 1×10-3 से 3×10-1 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 3×1011 से 1x10 हर्ट्स तक ।

उत्पादन विशेष निर्वातित नलिका में दोलित्र धारा से तथा वैद्युत परिपथों में विद्युतचुम्बकीय दोलित्रो द्वारा ।

गुण: परावर्तन व ध्रुवणा

उपयोग : अपनी लघु तरंगदैर्घ्य के कारण विमान संचालन में रेडार प्रणाली के लिये उपयुक्त है । रेडार में , उपग्रहों तथा लम्बी दूरी वाले येतार संचार में , माइक्रोवेव ओवन इन तरंगो का एक रोचक घरेलू अनुप्रयोग है ।

(7.) रेडियो तरंगें ( Radio Waves )

तरंगदैर्घ्य परिसर : 1×10-1 से 1×104 मीटर तक ।

आवृत्ति परिसर : 3×109 से 3x 104 हर्ट्स तक ।

उत्पादनः दोलित्र विद्युत परिपथों ( oscillating electric circuits ) से ।

गुण : परावर्तित , विवर्तित होती है ।

उपयोग : रेडियो एवं दूरदर्शन की संचार प्रणालियों में , सेल्यूलर फोनों में अत्युच्च आवृत्ति ( UHF ) बैण्ड की रेडियो तरंगों का उपयोग करके ध्वनि सन्देशों के आदान – प्रदान की व्यवस्था की जाती है ।

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