वैद्युत विभवांतर की भूमिका-voltage-electric potential

वैद्युत विभव –

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विद्युत विभव की अवधारणा को तरल प्रवाह के निम्नलिखित उदाहरण के द्वारा समझा जा सकता है यदि किसी तरल के दो पात्रों में भिन्न लंबाइयों तक भरा जाए और उन्हें एक नली के तारा चित्रानुसार जोड़ दिया जाए तो तरल ऊँचे स्तर से निचले स्तर की ओर बहेगा । तरल का flow तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों पात्रों में उसकी मात्रा बराबर नहीं हो जाएगी । स्पष्ट रूप से तरल के प्रवाह की दिशा सिर्फ तरल के स्तरों के अंतर पर निर्भर करती है , न कि पात्रों में तरल की मात्रा के ऊपर ।

vibhav

जिस प्रकार तरल ऊँचे स्तर से नीचे के स्तर की ओर बहता है , उसी प्रकार हम आवेशित वस्तुओं के विद्युत गुण की कल्पना कर सकते हैं जो आवेश के प्रवाह की दिशा का निर्धारण करता है । यह गुण विद्युत विभव कहलाता है ) तरल के प्रवाह में तरल के स्तर द्वारा निभाई गई भूमिका आवेश प्रवाह में विद्युत विभव द्वारा निभाई जाती है ।

जब दो आवेशित कणों को विद्युत रूप से संबद्ध कर दिया जाता है , तो आवेश के प्रवाह की दिशा विद्युत विभव पर निर्भर करती है न कि दोनों कणों के आवेश की मात्रा पर । आवेश सदैव उच्च विद्युत से निम्न विद्युत विभव की ओर प्रवाहित होता है ।

अत : विद्युत विभव वह भौतिक मात्रा है जो आवेश के प्रवाह की दिशा का निर्धारण आवेश करती है जब दो कणों को विद्युत रूप से जोड़ दिया जाता है । उदाहरण के लिए अगर हमारे पास दो आवेशित गोले A तथा B हों , जिनमें A का आवेश B के आवेश से अधिक हो , तब गोलों A तथा B को जोड़ने पर गोले A से आवेश गोले B की ओर प्रवाहित होगा।

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विभवांतर

धारा के एक बिंदु से दूसरे बिंदु की ओर बहने के लिए दोनो बिंदुओं के बीच विभव होना चाहिए । विभवांतर की मानक इकाई वोल्ट है । विभवांतर को volt द्वारा नापा जाता है ।

धारा के प्रवाह की पारंपरिक दिशा – मान लीजिए दो आवेशित कण A तथा B A का विभव उच्च है जबकि B का विभव निम्न है । जब A तथा B को धातु के तार द्वारा जोड़ दिया जाता है तो इलेक्ट्रॉन निम्न से उच्च विभव की ओर प्रवाहित होने लगते हैं । इसके परिणामस्वरूप , उनके बीच विभवांतर कम हो जाता है । इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा निम्न से उच्च विभव की ओर होती है , जब कि धारा के प्रवाह की दिशा उच्च विभव से निम्न विभव की ओर होती है । दूसरे शब्दों में , धारा के प्रवाह की पारंपरिक दिशा , इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह की दिशा के विपरीत होता है । धारा तब तक प्रवाहित होती रहती है , जब तक कि A तथा B के विभव समान नहीं हो जाते हैं ।

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