maurya samrajya- history notes-ancient history

part 01

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नमस्कार दोस्तों एक बार फिर आपका स्वागत है mynewradiant.com पर और इस बार हम लेकर हाजिर हुयें हैं आप सभी की डिमांड पर मौर्या साम्राज्य से related notes.

दोस्तों हमने इस आर्टिकल में मौर्या साम्राज्य को काफी विस्तार से समझने की कोशिश की है इस आर्टिकल को अच्छी तरह से पूरा पड़ें ताकि इस हर पॉइंट आपको समझ आ सके.

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मौर्य साम्राज्य

चन्द्रगुप्त मौर्य का इतिहास | Chandragupta ...
  1. मौर्य वंश का संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य का जन्म 345 ईसा पूर्व में हुआ था ।
  2. जस्टिन ने चन्द्रगुप्त मौर्य को गेन्द्रोकोट्टस कहा है , जिसकी पहचान विलियम जोन्म ने चन्द्रगुप्त मौर्य से की है ।
  3. विशाखदत कृत मुद्रारावास में चन्द्रगुप्त मौर्य के लिए वृषल ( आशय – निम्न कुल में उत्पन्न ) शब्द का प्रयोग किया गया।
  4. धनानंद को हराने में चाणक्य ( कौटिल्य / विष्णुगुप्त ) ने चन्द्रगुप्त मौर्य की मदद की थी , जो बाद में चन्द्रगुप्त का प्रधानमंत्री बना । इसके द्वारा लिखित पुस्तक अर्थशास्त्र है , जिसका संबंध राजनीति से है ।
  5. चन्द्रगुप्त मगध की राजगद्दी पर 322 ईसा पूर्व में बैठा ।
  6. चन्द्रगुप्त जैनधर्म का अनुयायी था ।
  7. चन्द्रगुप्त ने अपना अंतिम समय कर्नाटक के श्रवणबेलगोला नामक स्थान पर बिताया ।
  8. चन्द्रगुप्त ने 305 ईसा पूर्व में सेल्यूकस निकेटर को हराया ।
  9. – सेल्यूकस निकेटर ने अपनी पुत्री कार्नेलिया की शादी चन्द्रगुप्त मौर्य के साथ कर दी और युद्ध की शर्तों के अनुसार चार प्रांत काबुल , कन्धार , हेरात एवं मकरान चन्द्रगुप्त को दिए ।
  10. – चन्द्रगुप्त मौर्य ने जैनी गुरु भद्रबाहु से जैनधर्म की दीवा ली थी ।
  11. – मेगास्थनीज सेल्यूकस निकेटर का राजदूत था , जो चन्द्रगुप्त के दरबार में रहता था ।
  12. – मेगास्थनीज द्वारा लिखी गयी , पुस्तक इंडिका है । मेगास्थनीज के अनुसार – सम्राट का जनता के सामने आने के अवसरों पर शोभा यात्रा के रूप में जश्न मनाया जाता है । उन्हें एक सोने के पालकी में ले जाया जाता है । उनके अंगरक्षक सोने और चाँदी से अलंकृत हाथियों पर सवार रहते हैं । कुछ अगरबाक पेड़ों को लेकर चलते हैं । इन पेड़ों पर प्रशिक्षित तोतों का मुण्ड रहता है जो सम्राट के सिर के चारों तरफ चक्कर लगाता रहता है । राजा सामान्यतः हथियारबंद महिलाओं से घिरे होते हैं । उनके खाना खाने के पहले खास नौकर उस खाने को चखते हैं । वे लगातार दो रात एक ही कमरे में नहीं सोते थे ।

पाटलिपुत्र के बारे में

 पाटलिपुत्र एक विशाल प्राचीर से घिरा है , जिसमें 570 बुर्ज और 64 द्वार है । दो और तीन मजिल वाले पर लकड़ी और कधी ईटों से बने हैं । राजा का महल भी काठ का बना है जिसे पत्थर की नकाशी से अलकृत किया गया है । यह चारों तरफ से उद्यानों और चिड़ियों के लिए बने बसेरों से घिरा है । 
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बिन्दुसार

  1. चन्द्रगुप्त मौर्य का उत्तराधिकारी बिन्दुसार हुआ , जो 298 ई ० पू ० में मगध की राजगद्दी पर बैठा ।
  2. अमित्रघात के नाम से बिन्दुसार जाना जाता है । अमित्रघात का अर्थ है – शत्रु विनाशक ।
  3. बिन्दुसार आजीवक सम्प्रदाय का अनुयायी था । ‘ वायुपुराण ‘ में बिन्दुसार को भद्रसार ( या वारिसार ) कहा गया है ।
  4. स्ट्रैबो के अनुसार सीरियन नरेश एण्टियोकस ने बिन्दुसार के दरबार में डाइमेकस नामक राजदूत भेजा । इसे ही मेगास्थनीज का उत्तराधिकारी माना जाता है ।
  5. जैन ग्रंथों में बिन्दुसार को सिंहसेन कहा गया है ।
  6. बिन्दुसार के शासनकाल में तक्षशिला में हुए दो विद्रोहों का वर्णन है । इस विद्रोह को दबाने के लिए बिन्दुसार ने पहले सुसीम को और बाद में अशोक को भेजा ।
  7. एथीनियस के अनुसार बिन्दुसार ने सीरिया के शासक एण्टियोकस- I से मदिरा , सूखे अंजीर एवं एक दार्शनिक भेजने की प्रार्थना की थी ।
  8. बौद्ध विद्वान् तारानाथ ने बिन्दुसार को 16 राज्यों का विजेता बताया है ।
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अशोक

Chakravartin Ashok Samrat
samrat ashok
  1. बिन्दुसार का उत्तराधिकारी अशोक महान हुआ जो 269 ई ० पू ० में मगध की राजगद्दी पर बैटा ।
  2. राजगद्दीHEAT-New RADIANT GK SERIES PART 2 पर बैठने के समय अशोक अवन्ति का राज्यपाल था ।
  3. मास्की एवं गुर्जरा अभिलेख में अशोक का नाम अशोक मिलता है ।
  4. पुराणों में अशोक को अशोकवर्धन कहा गया है ।
  5. अशोक ने अपने अभिषेक के 8 वें वर्ष लगभग 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया और कलिंग की राजधानी तोसली पर अधिकार कर लिया ।
  6. ” प्लिनी का कथन है कि मिस्र का राजा फिलाडेल्फस [ टॉलमी ।। ] ने पाटलिपुत्र में डियानीसियस नाम का एक राजदूत भेजा था । ( अशोक के दरबार में ) उपगुप्त नामक बौद्ध भिक्षु ने अशोक को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी ।
  7. शोक ने आजीवकों को रहने हेतु बराबर की पहाड़ियों में चार गुफाओं का निर्माण करवाया , जिनका नाम कर्म , चोपार, सुदामा तथा विश्व झोपड़ी था ।
  8. अशोक की माता का नाम सुभद्रांगी था ।
  9. अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपने पुत्र महेन्द्र एवं पुत्री संघमित्रा को श्रीलंका भेजा ।
  10. भारत में शिलालेख का प्रचलन सर्वप्रथम अशोक ने किया ।
  11. अशोक के शिलालेखों में ब्राह्मी , खरोष्ठी , ग्रीक एवं अरमाइक लिपि का प्रयोग हुआ है । ग्रीक एवं अरमाइक लिपि का अभिलेख अफगानिस्तान से , खरोष्टी लिपि का अभिलेख उत्तर पश्चिम पाकिस्तान से और शेष भारत से ब्राह्मी लिपि के अभिलेख मिले हैं ।
  12. अशोक के अभिलेखों को तीन भागों में बाँटा जा सकता है ( 1 ) शिलालेख , GI ) स्तम्भलेख तया ( iii ) गुहालेख ।
  13. अशोक के शिलालेख की खोज 1750 ई ० में पाड्रेटी फेन्थैकर ने की थी । इनकी संख्या -14 है । अशोक के अभिलेख पढ़ने में सबसे पहली सफलता 1837 ई ० में जेम्स प्रिसेप को हुई
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नोट : अशोक के पौत्र दशरथ ने आजीविकों को नागार्जुन गुफा प्रदान की थी ।

मौर्य वंश | Knowledge quotes, History notes, Study materials
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